इतिहास! झारखंड को क़रारी शिकस्त देते हुए उत्तराखंड ने पहली बार रणजी ट्रॉफ़ी के सेमीफाइनल में जगह बनाई
उत्तराखंड ने रणजी ट्रॉफी में इतिहास रचा [स्रोत: @ANI/X.com]
जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में खेले गए रणजी ट्रॉफ़ी एलीट 2025-26 के पहले क्वार्टर फाइनल में उत्तराखंड ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए झारखंड को एक पारी और छह रन से हरा दिया।
मज़बूत गेंदबाज़ी, धैर्यपूर्ण बल्लेबाज़ी और लगातार दबाव के दम पर उत्तराखंड ने पहले दिन से ही कभी पिछड़ने का सामना नहीं किया।
झारखंड दोनों पारियों में लय बनाने के लिए संघर्ष करता रहा और आखिरकार उत्तराखंड की टीम की गहराई और अनुशासन के आगे पस्त हो गया।
झारखंड को पहली पारी में संघर्ष करना पड़ा
पहले बल्लेबाज़ी करने उतरे झारखंड की मुश्किलें शुरुआत में ही शुरू हो गईं। जनमेजय जोशी और आदित्य रावत ने सुबह की अनुकूल परिस्थितियों का अच्छा फायदा उठाया। शिखर मोहन सस्ते में आउट हो गए, उनके तुरंत बाद शरनदीप सिंह और मनीषी भी पवेलियन लौट गए।
कुमार कुशाग्र भी जम नहीं पाए। कप्तान विराट सिंह ने 47 रनों की सधी हुई पारी खेलकर पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन रन रेट धीमी ही रही। दूसरे छोर पर विकेट गिरते रहे, जिनमें रॉबिन मिंज का पहली ही गेंद पर आउट होना भी शामिल था।
झारखंड की ओर से सिर्फ आदित्य सिंह ने ही सही मायनों में प्रतिरोध दिखाया। धैर्यपूर्वक बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने 167 गेंदों में 83 रन बनाए और निचले क्रम को संभाले रखा। उनकी पारी में दस चौके और एक छक्का शामिल था, और वे साफ़ तौर से झारखंड के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ साबित हुए।
हालांकि, उन्हें दूसरे बल्लेबाज़ों का साथ नहीं मिला। झारखंड की टीम 85 ओवर में 235 रन पर ऑल आउट हो गई। जोशी ने चार विकेट लिए, जबकि आदित्य रावत और मयंक मिश्रा ने मिलकर छह विकेट लिए।
उत्तराखंड ने पलटवार करते हुए नियंत्रण हासिल किया
वहीं दूसरी ओर, उत्तराखंड ने कहीं अधिक संयमित बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन किया। अवनीश सुधा ने 64 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को स्थिर शुरुआत दी। शुरुआती विकेट गिरने के बाद, कुणाल चंदेला ने तीसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी करते हुए 68 रन बनाकर टीम को मज़बूती प्रदान की।
जगदीश सुचित ने अपने करियर की सबसे लंबी और प्रभावशाली पारी खेली। उन्होंने लगभग चार सेशन तक गेंदबाज़ी की और 172 गेंदों में 70 रन बनाकर विपक्षी टीम पर से दबाव कम किया और उन्हें पस्त कर दिया।
सौरभ रावत और अभय नेगी ने निचले क्रम में महत्वपूर्ण रन बनाकर उपयोगी योगदान दिया। झारखंड ने अपने गेंदबाज़ों को बारी-बारी से आज़माया लेकिन लगातार सफलता हासिल नहीं कर सका।
अंत में उत्तराखंड की टीम 371 रन पर ऑल आउट हो गई, जिससे झारखंड को 136 रनों की शानदार बढ़त मिल गई। झारखंड के गेंदबाज़ों ने कड़ी मेहनत की, लेकिन उनकी गेंदबाज़ी में तीक्ष्णता की कमी साफ नज़र आई और उन्हें भारी बल्ले से खेलना पड़ा।
पहली पारी के बाद झारखंड की स्थिति एक बार फिर बिगड़ गई
भारी अंतर से पिछड़ रही झारखंड टीम को दूसरी पारी में मज़बूत प्रदर्शन की ज़रूरत थी, लेकिन वह एक बार फिर लड़खड़ा गई। अभय नेगी ने शुरुआत में ही दो विकेट लेकर दोनों सलामी बल्लेबाज़ों को सस्ते में आउट कर दिया।
हालांकि, विराट सिंह ने कड़ी टक्कर दी और 55 रन बनाकर अपनी पारी में मज़बूत इरादा और तत्परता दिखाई। कुमार कुशाग्र ने कुछ देर तक उनका साथ दिया और साझेदारी टूटने तक उनकी बल्लेबाज़ी ठीक चल रही थी।
मयंक मिश्रा ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए 22 रन देकर पांच विकेट लेकर निर्णायक प्रहार किया। उन्होंने गेंद को सही स्विंग और सटीकता से फेंका और मध्य और निचले क्रम के बल्लेबाज़ों को ध्वस्त कर दिया।
झारखंड की टीम महज़ 41 ओवरों में 130 रन पर ऑल आउट हो गई, जिससे उत्तराखंड को एक शानदार और ऐतिहासिक जीत मिली।
उत्तराखंड अब 15 फरवरी को रणजी ट्रॉफ़ी 2025-26 एलीट सेमीफाइनल में कर्नाटक के ख़िलाफ़ खेलेगा। नॉकआउट मैच का स्थान अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन उत्तराखंड के लिए दांव पहले से कहीं ज्यादा ऊंचे होंगे।




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